“शिक्षक का शिक्षक होना जरूरी है”
केवल परीक्षा पास करना या चंद किताबें पढ़कर थोड़ा सा ज्ञान अर्जित कर लेना शिक्षक होना नहीं है ये केवल वेतनभोगी होना है ।शिक्षक होने के लिए न केवल अध्ययनशील रहना होता है बल्कि विभिन्न बुरी वृत्तियों जैसे काम , क्रोध , मोह , लोभ का दमन करके आत्मनियंत्रण रखना होता है ।
सहनशीलता, अनुशासन , धैर्य , संयम रखना होता है । आप नज़ीर पेश करेंगे तभी बच्चों को मार्गदर्शन दे पाएंगे । क्योंकि कही गई बातें वहीं प्रभावी है जो स्वयं के आचरण में होती है ।
मैं पिछले पंद्रह वर्षों से शिक्षण में हूँ , आज तक किसी विद्यार्थी को न नेगेटिव बोला , न कभी किसी को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया , न किसी को व्यक्तिगत रूप से मानसिक पीड़ा दी । यहाँ तक की मैं कभी बच्चों को “तू, तेरा , तुम “ कहकर भी संबोधन नहीं करता .. अव्वल तो ये रहा कि आज तक ये स्थिति क्लास में कभी आई ही नहीं ।
मुझे लगता है आप बच्चे की उम्मीद के अनुसार पढ़ाते है तो ये स्थिति आती भी नहीं है , बच्चा क्लास में लीन रहता है , शिक्षक मस्तिष्क के ज़रिए शिक्षार्थी के भीतर प्रवेश कर जाता है । खैर बच्चों को समझना होगा कि कौन शिक्षक है कौन छद्म शिक्षक!
✍️ डॉ गणपत सिंह राजपुरोहित
केवल परीक्षा पास करना या चंद किताबें पढ़कर थोड़ा सा ज्ञान अर्जित कर लेना शिक्षक होना नहीं है ये केवल वेतनभोगी होना है ।शिक्षक होने के लिए न केवल अध्ययनशील रहना होता है बल्कि विभिन्न बुरी वृत्तियों जैसे काम , क्रोध , मोह , लोभ का दमन करके आत्मनियंत्रण रखना होता है ।
सहनशीलता, अनुशासन , धैर्य , संयम रखना होता है । आप नज़ीर पेश करेंगे तभी बच्चों को मार्गदर्शन दे पाएंगे । क्योंकि कही गई बातें वहीं प्रभावी है जो स्वयं के आचरण में होती है ।
मैं पिछले पंद्रह वर्षों से शिक्षण में हूँ , आज तक किसी विद्यार्थी को न नेगेटिव बोला , न कभी किसी को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया , न किसी को व्यक्तिगत रूप से मानसिक पीड़ा दी । यहाँ तक की मैं कभी बच्चों को “तू, तेरा , तुम “ कहकर भी संबोधन नहीं करता .. अव्वल तो ये रहा कि आज तक ये स्थिति क्लास में कभी आई ही नहीं ।
मुझे लगता है आप बच्चे की उम्मीद के अनुसार पढ़ाते है तो ये स्थिति आती भी नहीं है , बच्चा क्लास में लीन रहता है , शिक्षक मस्तिष्क के ज़रिए शिक्षार्थी के भीतर प्रवेश कर जाता है । खैर बच्चों को समझना होगा कि कौन शिक्षक है कौन छद्म शिक्षक!
✍️ डॉ गणपत सिंह राजपुरोहित