क्या हम सिर्फ अपना ही भला चाहते हैं?
कल, 23 मार्च को Ph.D. Entrance Test (PAT) की परीक्षा संपन्न हो गई। पहले भी एक पोस्ट के माध्यम से सभी परीक्षार्थियों से निवेदन किया गया था कि अगर वे परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, तो क्वेश्चन पेपर की PDF भेज दें ताकि आने वाले वर्षों में छात्रों की मदद की जा सके। यह सिर्फ एक छोटी-सी अपील थी, जिससे भविष्य में किसी और को वही संघर्ष न करना पड़े, जो आज आप कर रहे थे।
सोचिए, जब आप परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब आपने भी पुराने प्रश्न पत्रों की तलाश की होगी। कभी किसी से मांगा होगा, कभी इंटरनेट पर खोजा होगा, और कभी निराश भी हुए होंगे कि "काश कोई हमें सही दिशा दिखा देता!" मगर आज, जब आपके पास मौका था किसी और की सहायता करने का, तब कितने लोगों ने इसे समझा?
अफसोस की बात यह है कि सिर्फ दो लोगों ने क्वेश्चन पेपर भेजा, एक हिंदी का और एक इकोनॉमिक्स का। यह देखकर सच में दुख होता है कि ज्यादातर लोग सिर्फ अपने काम से मतलब रखते हैं। जब तक हमें जरूरत होती है, तब तक हम हर जगह भागते हैं, लेकिन जब हमारी बारी आती है दूसरों की सहायता करने की, तो हम पीछे हट जाते हैं।
हम इस चैनल के माध्यम से हजारों छात्रों की निस्वार्थ मदद कर रहे हैं, बिना किसी आर्थिक लाभ के। अगर हम भी सिर्फ अपने बारे में सोचते, तो क्या आपको इतनी सारी जानकारियाँ मुफ्त में मिल पातीं? अगर हमारी सोच भी वही होती, जो आज अधिकतर लोगों की है, तो क्या कोई भी छात्र सही मार्गदर्शन पा सकता?
समाज सिर्फ कुछ पाने से नहीं, साझेदारी और सहयोग से चलता है। अगर हम चाहते हैं कि भविष्य में शिक्षा प्रणाली बेहतर हो, तो हमें खुद को बदलना होगा। यह मत सोचिए कि "मेरे प्रयास से क्या होगा?" बल्कि यह सोचिए कि "अगर सब ऐसे ही सोचते रहे, तो क्या होगा?"
अभी भी देर नहीं हुई है। अगर आपके पास परीक्षा का प्रश्न पत्र है, तो कृपया इसे @ItzRishavMani से साझा करें।
कल, 23 मार्च को Ph.D. Entrance Test (PAT) की परीक्षा संपन्न हो गई। पहले भी एक पोस्ट के माध्यम से सभी परीक्षार्थियों से निवेदन किया गया था कि अगर वे परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, तो क्वेश्चन पेपर की PDF भेज दें ताकि आने वाले वर्षों में छात्रों की मदद की जा सके। यह सिर्फ एक छोटी-सी अपील थी, जिससे भविष्य में किसी और को वही संघर्ष न करना पड़े, जो आज आप कर रहे थे।
सोचिए, जब आप परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब आपने भी पुराने प्रश्न पत्रों की तलाश की होगी। कभी किसी से मांगा होगा, कभी इंटरनेट पर खोजा होगा, और कभी निराश भी हुए होंगे कि "काश कोई हमें सही दिशा दिखा देता!" मगर आज, जब आपके पास मौका था किसी और की सहायता करने का, तब कितने लोगों ने इसे समझा?
अफसोस की बात यह है कि सिर्फ दो लोगों ने क्वेश्चन पेपर भेजा, एक हिंदी का और एक इकोनॉमिक्स का। यह देखकर सच में दुख होता है कि ज्यादातर लोग सिर्फ अपने काम से मतलब रखते हैं। जब तक हमें जरूरत होती है, तब तक हम हर जगह भागते हैं, लेकिन जब हमारी बारी आती है दूसरों की सहायता करने की, तो हम पीछे हट जाते हैं।
हम इस चैनल के माध्यम से हजारों छात्रों की निस्वार्थ मदद कर रहे हैं, बिना किसी आर्थिक लाभ के। अगर हम भी सिर्फ अपने बारे में सोचते, तो क्या आपको इतनी सारी जानकारियाँ मुफ्त में मिल पातीं? अगर हमारी सोच भी वही होती, जो आज अधिकतर लोगों की है, तो क्या कोई भी छात्र सही मार्गदर्शन पा सकता?
समाज सिर्फ कुछ पाने से नहीं, साझेदारी और सहयोग से चलता है। अगर हम चाहते हैं कि भविष्य में शिक्षा प्रणाली बेहतर हो, तो हमें खुद को बदलना होगा। यह मत सोचिए कि "मेरे प्रयास से क्या होगा?" बल्कि यह सोचिए कि "अगर सब ऐसे ही सोचते रहे, तो क्या होगा?"
अभी भी देर नहीं हुई है। अगर आपके पास परीक्षा का प्रश्न पत्र है, तो कृपया इसे @ItzRishavMani से साझा करें।