आवश्यकता से अधिक सोचना व्यर्थ समय ही बर्बाद करना है।
क्योंकि, जो बीत गया है उसे बदला नहीं जा सकता और भविष्य की होने वाली घटनाओं का वर्तमान में भय करने का कोई अर्थ नहीं है। इनमे से अधिकांश घटनाएँ तो घटित भी नहीं होती।
क्योंकि, जो बीत गया है उसे बदला नहीं जा सकता और भविष्य की होने वाली घटनाओं का वर्तमान में भय करने का कोई अर्थ नहीं है। इनमे से अधिकांश घटनाएँ तो घटित भी नहीं होती।