मुहब्बत से जो बिछड़ी वो वफ़ायें शोर करती हैं,
किसी के हिस्से की सारी दुआयें शोर करती हैं,
लहरें खामोश बैठी हैं समन्द्र के किनारे पर,
और ये बेचैन सी पागल हवायें शोर करती हैं,
मुद्दत हुई मुझको दुनिया की महफ़िलें छोड़े,
पर कम्बख्त अब भी यादों की सदायें शोर करती हैं!
@kataizaharila
किसी के हिस्से की सारी दुआयें शोर करती हैं,
लहरें खामोश बैठी हैं समन्द्र के किनारे पर,
और ये बेचैन सी पागल हवायें शोर करती हैं,
मुद्दत हुई मुझको दुनिया की महफ़िलें छोड़े,
पर कम्बख्त अब भी यादों की सदायें शोर करती हैं!
@kataizaharila