🙋♀बहू में छिपी हैं बेटी🙋♀
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बेडरूम के दरवाजे पर खड़खड़ाहट होने पर सुधा एकदम नींद से जागी और साड़ी का पल्लू सिर पर रखकर घड़ी की तरफ नजर डाली तो पता चला कि सुबह के छः बज रहे हैं। सुधा एकदम घबरा गई उसको सुबह पांच बजे उठना था लेकिन लेट हो गई। उसे लगा कि आज सासू मां के कड़वे प्रवचन अवश्य सुनने को मिलेंगे।उसने डरते हुए दरवाजा खोला और स्पष्टीकरण मैं बोल पड़ी मां जी रात को सिर दर्द होने के कारण देरी से नींद आई थी इसलिए उठने में थोड़ी देर हो गई। कोई बात नहीं बेटा सासु सरला की शहद भरी मीठी बात सुन सहसा सुधा को विश्वास नहीं हुआ।उसने देखा उसकी सासू मां चाय लेकर आई थी। चाय की ट्रे सुधा को पकड़ाकर बोली चाय पी लो और थोड़े समय और आराम कर लो और उसने बेडरूम का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। सुधा चाय की ट्रे हाथ में लिए असमंजस में पड़ गई।उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसे आज उसकी सास ने बेटा कहकर पुकारा , चाय बना कर दे गई, वह उसे आराम करने का कह गई ।
सुधा की शादी हुए पांच साल हो चुके थे इन पांच सालों में सुधा की सास ने कभी भी सुधा को चाय बना कर नहीं दी , कभी उसकी तबीयत के बारे में नहीं पूछा था। सुधा की सास बेहद सख्त मिजाज की सास के अर्थों में सास थी।
सुधा को रोज सुबह पांच बजे उठना आवश्यक था। यदि किसी दिन सुधा पांच मिनट भी लेट हो जाती तो बाहर सासु मां के कड़वे प्रवचन शुरू हो जाते थे। सुधा को घर का सारा काम करना पड़ता,घर में भी पल्लू सिर पर रखना आवश्यक था, घर के बाहर जाने के लिए सुधा को सास की अनुमति आवश्यक थी, बिना सास की इच्छा के घर में पत्ता भी नहीं हिल सकता था ।सुधा का पति बेहद संवेदनशील इंसान था सुधा को बेहद प्यार करता था। सुधा पर मां के द्वारा लगाई जाने वाली पाबंदीयों से वह भी परेशान था। इसी तरह सुधा का ससुर बेहद सुलझा हुआ इंसान था मगर घर में इन दोनों की नहीं चलती थी। इन दोनों को भी जैसा सुधा की सास कहती थी वैसा ही करना पड़ता था ।सुधा का पति व ससुर बहुत अच्छे इंसान थे सुधा का हर तरह से ख्याल रखते थे इसलिए सास की इतनी पाबंदियों के बावजूद सुधा घर में खुश थी। बेशक उसे सास का व्यवहार बिल्कुल पसंद नहीं था मगर वह कुछ नहीं कर सकती थी।
सुधा व सुधा के पति को सरला
के आज के व्यवहार पर घोर आश्चर्य हो रहा था। वे सोच रहे थे कि आज सूरज किधर निकला। सुधा चाय पीकर वापस लेट गई एक झपकी ली थी कि उसे किचन में बर्तनो की आवाज आने लगी। सुधा तुरंत उठ कर किचन में पहुंची तो देखा कि उसकी सास सबके लिए नाश्ता तैयार कर रही थी। सुधा को देखकर उसकी सास ने कहा तुम लोग जल्दी नहा धोकर नाश्ते की टेबल पर आ जाओ। सुधा को फिर आश्चर्य हुआ कि आज यह क्या हो रहा है। सुधा की सास कभी किचन में कोई काम नहीं करती। किचन का सारा काम सुधा को ही करना होता था वह नहाकर तैयार होकर नाश्ते की टेबल पर पहुंची तब तक उसका पति व ससुर भी तैयार होकर नाश्ते की टेबल पर आ गए थे। सुधा की सास ने अपने हाथों से सबको नाश्ता सर्व किया व खुद भी एक प्लेट में नाश्ता लेकर बैठ गई। सुधा को फिर आश्चर्य हुआ कि आज नाश्ता सुधा का मनपसंद बना हुआ था। सुधा उसका पति रवि व उसके ससुर सभी विस्मित थे किआज आखिरी हो क्यारहा हैं मगर कोई कुछ नहीं बोल रहा था ।अचानक सुधा की सास ने चुप्पी तोड़ी और अपने बेटे से बोली नाश्ते के बाद तुम सुधा को लेकर बाजार जाना और सुधा को दो चार इसकी मनपसंद के सलवार सूट दिला कर लाना, दिन भर घर में साड़ी में रहने से अच्छा है कि सलवार सूट में रहे ।उसने नाश्ते की टेबल से उठते उठते यह भी कह दिया है की आज का लंच वही तैयार करेगी।
सुधा की खुशी का तो पारावाह नहीं रहा। जब शादी करके आई थी तब वह चाहती थी कि कम से कम घर में उसे सलवार कुर्ता पहनने की छूट मिल जाए मगर सुधा की सास ने पहले दिन ही आदेशात्मक आज्ञा जारी कर दी थी कि शादी के बाद घर में भी उसे साड़ी ही पहननी होगी व हर वक्त सिर पर पल्लू रखना होगा मगर आज अचानक सुधा को सलवार सूट पहनने की छूट मिल जाने पर सुधा बहुत खुश थी ।वह पति के साथ बाजार जा कर चार ड्रेस लेकर आ गई ।घर आकर उसने देखा कि उसकी सास व ससुर डाइनिंग टेबल पर उन दोनों का इंतजार कर रहे थे ।सुधा की सासु बोली जल्दी से साड़ी बदल कर ड्रेस पहनकर डाइनिंग टेबल पर आ जाओ बहुत जोर की भूख लगी है। सुधा अपने कमरे में जाकर ड्रेस पहनी मगर बाहर आने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। तभी सास ने फिर आवाज देकर कहा कि बेटा जल्दी आओ भूख लग रही है। सुधा को विवश होकर ड्रेस में डाइनिंग टेबल पर आना पड़ा। आज वह ड्रेस में बहुत असहज महसूस कर रही थी। लंच में खीर पूरी बनी थी जो सुधा की मनपसंद डीश थी ।सब्जियां सुधा की पसंद की बनी थी। सुधा की सास बड़े प्रेम से सबको लंच सर्व कर रही थी। डाइनिंग टेबल पर एक बार फिर निस्तब्धता छा गई। सुधा हिम्मत कर बोली मांजी आज लंच बहुत स्वादिष्ट
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बेडरूम के दरवाजे पर खड़खड़ाहट होने पर सुधा एकदम नींद से जागी और साड़ी का पल्लू सिर पर रखकर घड़ी की तरफ नजर डाली तो पता चला कि सुबह के छः बज रहे हैं। सुधा एकदम घबरा गई उसको सुबह पांच बजे उठना था लेकिन लेट हो गई। उसे लगा कि आज सासू मां के कड़वे प्रवचन अवश्य सुनने को मिलेंगे।उसने डरते हुए दरवाजा खोला और स्पष्टीकरण मैं बोल पड़ी मां जी रात को सिर दर्द होने के कारण देरी से नींद आई थी इसलिए उठने में थोड़ी देर हो गई। कोई बात नहीं बेटा सासु सरला की शहद भरी मीठी बात सुन सहसा सुधा को विश्वास नहीं हुआ।उसने देखा उसकी सासू मां चाय लेकर आई थी। चाय की ट्रे सुधा को पकड़ाकर बोली चाय पी लो और थोड़े समय और आराम कर लो और उसने बेडरूम का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। सुधा चाय की ट्रे हाथ में लिए असमंजस में पड़ गई।उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसे आज उसकी सास ने बेटा कहकर पुकारा , चाय बना कर दे गई, वह उसे आराम करने का कह गई ।
सुधा की शादी हुए पांच साल हो चुके थे इन पांच सालों में सुधा की सास ने कभी भी सुधा को चाय बना कर नहीं दी , कभी उसकी तबीयत के बारे में नहीं पूछा था। सुधा की सास बेहद सख्त मिजाज की सास के अर्थों में सास थी।
सुधा को रोज सुबह पांच बजे उठना आवश्यक था। यदि किसी दिन सुधा पांच मिनट भी लेट हो जाती तो बाहर सासु मां के कड़वे प्रवचन शुरू हो जाते थे। सुधा को घर का सारा काम करना पड़ता,घर में भी पल्लू सिर पर रखना आवश्यक था, घर के बाहर जाने के लिए सुधा को सास की अनुमति आवश्यक थी, बिना सास की इच्छा के घर में पत्ता भी नहीं हिल सकता था ।सुधा का पति बेहद संवेदनशील इंसान था सुधा को बेहद प्यार करता था। सुधा पर मां के द्वारा लगाई जाने वाली पाबंदीयों से वह भी परेशान था। इसी तरह सुधा का ससुर बेहद सुलझा हुआ इंसान था मगर घर में इन दोनों की नहीं चलती थी। इन दोनों को भी जैसा सुधा की सास कहती थी वैसा ही करना पड़ता था ।सुधा का पति व ससुर बहुत अच्छे इंसान थे सुधा का हर तरह से ख्याल रखते थे इसलिए सास की इतनी पाबंदियों के बावजूद सुधा घर में खुश थी। बेशक उसे सास का व्यवहार बिल्कुल पसंद नहीं था मगर वह कुछ नहीं कर सकती थी।
सुधा व सुधा के पति को सरला
के आज के व्यवहार पर घोर आश्चर्य हो रहा था। वे सोच रहे थे कि आज सूरज किधर निकला। सुधा चाय पीकर वापस लेट गई एक झपकी ली थी कि उसे किचन में बर्तनो की आवाज आने लगी। सुधा तुरंत उठ कर किचन में पहुंची तो देखा कि उसकी सास सबके लिए नाश्ता तैयार कर रही थी। सुधा को देखकर उसकी सास ने कहा तुम लोग जल्दी नहा धोकर नाश्ते की टेबल पर आ जाओ। सुधा को फिर आश्चर्य हुआ कि आज यह क्या हो रहा है। सुधा की सास कभी किचन में कोई काम नहीं करती। किचन का सारा काम सुधा को ही करना होता था वह नहाकर तैयार होकर नाश्ते की टेबल पर पहुंची तब तक उसका पति व ससुर भी तैयार होकर नाश्ते की टेबल पर आ गए थे। सुधा की सास ने अपने हाथों से सबको नाश्ता सर्व किया व खुद भी एक प्लेट में नाश्ता लेकर बैठ गई। सुधा को फिर आश्चर्य हुआ कि आज नाश्ता सुधा का मनपसंद बना हुआ था। सुधा उसका पति रवि व उसके ससुर सभी विस्मित थे किआज आखिरी हो क्यारहा हैं मगर कोई कुछ नहीं बोल रहा था ।अचानक सुधा की सास ने चुप्पी तोड़ी और अपने बेटे से बोली नाश्ते के बाद तुम सुधा को लेकर बाजार जाना और सुधा को दो चार इसकी मनपसंद के सलवार सूट दिला कर लाना, दिन भर घर में साड़ी में रहने से अच्छा है कि सलवार सूट में रहे ।उसने नाश्ते की टेबल से उठते उठते यह भी कह दिया है की आज का लंच वही तैयार करेगी।
सुधा की खुशी का तो पारावाह नहीं रहा। जब शादी करके आई थी तब वह चाहती थी कि कम से कम घर में उसे सलवार कुर्ता पहनने की छूट मिल जाए मगर सुधा की सास ने पहले दिन ही आदेशात्मक आज्ञा जारी कर दी थी कि शादी के बाद घर में भी उसे साड़ी ही पहननी होगी व हर वक्त सिर पर पल्लू रखना होगा मगर आज अचानक सुधा को सलवार सूट पहनने की छूट मिल जाने पर सुधा बहुत खुश थी ।वह पति के साथ बाजार जा कर चार ड्रेस लेकर आ गई ।घर आकर उसने देखा कि उसकी सास व ससुर डाइनिंग टेबल पर उन दोनों का इंतजार कर रहे थे ।सुधा की सासु बोली जल्दी से साड़ी बदल कर ड्रेस पहनकर डाइनिंग टेबल पर आ जाओ बहुत जोर की भूख लगी है। सुधा अपने कमरे में जाकर ड्रेस पहनी मगर बाहर आने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। तभी सास ने फिर आवाज देकर कहा कि बेटा जल्दी आओ भूख लग रही है। सुधा को विवश होकर ड्रेस में डाइनिंग टेबल पर आना पड़ा। आज वह ड्रेस में बहुत असहज महसूस कर रही थी। लंच में खीर पूरी बनी थी जो सुधा की मनपसंद डीश थी ।सब्जियां सुधा की पसंद की बनी थी। सुधा की सास बड़े प्रेम से सबको लंच सर्व कर रही थी। डाइनिंग टेबल पर एक बार फिर निस्तब्धता छा गई। सुधा हिम्मत कर बोली मांजी आज लंच बहुत स्वादिष्ट